Wednesday, September 8, 2010

बोलो ना ?


कुछ सवाल अगर पूछूं तुम से 
उनका जवाब दोगे ना ?

पढ़ोगे जब कभी भी ख़त मेरे
ज़रा सा तो मुस्कुराओगे ना?

मिलेगा जब कोई मुझ जैसा 
उससे मेरे शब्द दोहराओगे ना?

जब कभी भी प्यार का ज़िक्र होगा 
इक पल को तो मुझे याद करोगे ना?

कभी ग़म के हो बादल और तन्हाई लगे 
तो मुझसे अपना दर्द बताओगे ना?

चली गयी अगर दूर अचानक 
इक आंसू तोह मेरे लिए बहाओगे ना ?

इक मुलाक़ात का वादा जो अधुरा रह गया 
उसे पूरा करने इक आखरी बार तो आओगे ना?

6 comments:

  1. Reminds me of the song titled "Hero" by Enrique Iglesias.

    जज़्बात धारा बन कर फूट पड़े, और अंकुर नए निकल आये कविताओं के!

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  2. Jaspreet , well i just loved this poem .. honestly .. it just reminded me of a friend , whom i terribly miss , and your words , just made me felt ....Its really really wonderful ...

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  3. http://writefreek.blogspot.com/2010/09/my-first-award-yippi.html

    Hey I've tagged you :) check out the link

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  4. what do i say .. my story that seems to be ... awesome and beautiful

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  5. ohh the importance of the last goodbye.. I felt like singing a song.

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  6. such a lovely one :) :) very beautifully crafted jaspreet :)

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